झटपट समझें
मंडी शुल्क 2% से घटाकर 1.5% किया गया है, जिससे छोटे व्यापारियों की लागत लगभग 25% कम होगी।
मुख्य बातें
- शुल्क 2% से घटकर 1.5%
- एक अप्रैल से लागू
- अनुमानित बचत 25% प्रति लेनदेन
राज्य सरकार ने मंडी शुल्क की दर 2 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दी है। नई दर एक अप्रैल से लागू होगी और यह सभी अधिसूचित मंडियों पर लागू होगी।
छोटे कारोबारियों के लिए यह अंतर मामूली नहीं है। दस लाख रुपये के सालाना कारोबार पर शुल्क बीस हजार से घटकर पंद्रह हजार रह जाएगा, यानी हर लेनदेन पर लगभग 25 प्रतिशत की बचत।
मंडी समिति के एक पदाधिकारी ने बताया कि शुल्क में कटौती से समिति की आय घटेगी, और उसकी भरपाई के लिए राज्य से अनुदान मांगा गया है।
व्यापार मंडल ने फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कहा है कि असली दिक्कत शुल्क की दर नहीं बल्कि तौल और भुगतान में देरी है। जिला अस्पताल की डायलिसिस इकाई की तरह यहां भी सुविधा से अधिक उसके संचालन का सवाल है।
नई दर की अधिसूचना इस सप्ताह जारी होने की उम्मीद है।
अधिसूचना के मुताबिक नई दर सभी अधिसूचित जिंसों पर एक समान लागू होगी। पहले फल और सब्जी पर अलग दर का प्रस्ताव था, जिसे अंतिम मसौदे से हटा दिया गया।
मंडी समितियों की आय का बड़ा हिस्सा इसी शुल्क से आता है, और उसी से मंडी परिसर की सड़क, बिजली और तौल कांटों का रखरखाव होता है। एक समिति पदाधिकारी ने बताया कि उनकी सालाना आय में लगभग चालीस लाख रुपये की कमी आएगी।
राज्य के कृषि विपणन विभाग का कहना है कि भरपाई के लिए बजट में अलग मद रखा गया है, और मंडियों का रखरखाव प्रभावित नहीं होगा।
व्यापारियों की दूसरी शिकायत भुगतान चक्र की है। कई मंडियों में भुगतान अब भी सात से दस दिन में होता है, जबकि नियम तीन दिन का है। विभाग ने कहा है कि इस पर अलग से समीक्षा होगी।