झटपट समझें
लखनऊ नगर निगम ने 3.2 लाख संपत्तियों का डिजिटल कर रिकॉर्ड पूरा किया, जिससे कर भुगतान ऑनलाइन हो सकेगा।
मुख्य बातें
- 3.2 लाख संपत्तियों का सर्वेक्षण पूरा
- ऑनलाइन कर भुगतान अगले महीने से
- पुराने रिकॉर्ड से 18% अधिक संपत्तियां दर्ज
लखनऊ नगर निगम ने शहर की 3.2 लाख संपत्तियों का डिजिटल कर रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। नगर आयुक्त ने बताया कि सर्वेक्षण पिछले साल मार्च में शुरू हुआ था और इसे चौदह महीने में पूरा किया गया।
रिकॉर्ड में हर संपत्ति का क्षेत्रफल, उपयोग और स्वामी का नाम दर्ज है। पुराने कागजी रजिस्टर की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक संपत्तियां दर्ज हुई हैं। इनमें से अधिकतर गोमती नगर विस्तार और आलमबाग के उन इलाकों की हैं जो पिछले एक दशक में बसे।
ऑनलाइन भुगतान की सुविधा अगले महीने से शुरू होगी। करदाता पोर्टल पर अपना बिल देख सकेंगे, बकाया की गणना कर सकेंगे और भुगतान की रसीद डाउनलोड कर सकेंगे। अभी यह काम वार्ड कार्यालय में ही होता है।
सभी पार्षद संतुष्ट नहीं हैं। विपक्ष के एक पार्षद ने कहा कि उनके वार्ड में कई मकानों का क्षेत्रफल वास्तविक से अधिक दर्ज हुआ है, और आपत्ति की अवधि तीस दिन से बढ़ाई जानी चाहिए।
नगर निगम का कहना है कि आपत्ति वार्ड कार्यालय और पोर्टल दोनों जगह दर्ज कराई जा सकती है, और सुनवाई के बाद ही नया बिल जारी होगा।
सर्वेक्षण का काम तीन एजेंसियों ने बांटकर किया। हर टीम के साथ एक नगर निगम कर्मचारी था, और विवाद की स्थिति में मौके पर ही नाप दोबारा लिया गया। आयुक्त के मुताबिक ऐसे मामले कुल संपत्तियों के दो प्रतिशत से कम रहे।
डिजिटल रिकॉर्ड का दूसरा असर वसूली पर पड़ने की उम्मीद है। पिछले वित्त वर्ष में निगम ने 214 करोड़ रुपये संपत्ति कर वसूला, जो लक्ष्य से लगभग 19 प्रतिशत कम रहा। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी वजह यह थी कि कई संपत्तियां रजिस्टर में दर्ज ही नहीं थीं।
करदाताओं के लिए व्यावहारिक बदलाव यह होगा कि बिल में अब संपत्ति का यूनिक आईडी नंबर छपेगा। यही नंबर पोर्टल पर डालकर पुराना भुगतान इतिहास भी देखा जा सकेगा।
निगम ने कहा है कि जिन मकानों का दर्ज क्षेत्रफल बदला है, उन्हें अलग से सूचना भेजी जाएगी। सूचना न मिलने पर भी करदाता पोर्टल पर अपना रिकॉर्ड देख सकते हैं।